Friday, September 19, 2025

"पीता नहीं, बल्की पीटा है"? Addictions Creation?

 शराब से या जुए से उगाही करने वाला समाज, कितना विकसित या विकृत हो सकता है?

कहाँ से आया ये प्र्शन? जब पाया की शराब "पीता नहीं, बल्की पीटा है"। आपको किसी को पीटना है या हराना है या ख़त्म करना है, तो कुछ नहीं करना, बस मुफ़्त की नशे की सप्लाई का बंदोबस्त कर दो। और ये किसी भी तरह के नशे पर लागू होता है। क्यूँकि, कोई भी नशा, एक बीमारी है। या कहो की किसी या किन्हीं तरह की कमियों की तरफ इशारा है। जैसे न्यूट्रिशन की कमी से उपजे विकार।  राजनितिक पार्टियाँ, अगर उस बीमारी का सही ईलाज करने की बजाय, उसको बढ़ावा देने लग जाएँ, तो क्या होगा? ऐसा शरीर, ऐसा इंसान या ऐसा समाज तो ख़त्म हो जाएगा। 

कोरोना के बाद जब आप पार्टी को जाना तो लगा ये कौन सी दुनियाँ है? ये पार्टियाँ ठेकों के भरोसे चलती हैं क्या? एक ऐसी पार्टी, जिन्हें अल्टरनेटिव राजनीती की चाहत वाले लोग, पुरानी राजनितिक पार्टियों की बजाय, विकल्प के रुप में देखने लगते हैं? इनके ठेकों के धंधों को देख जैसे ठिठक जाते हैं। कुछ-कुछ ऐसे ही, जैसे, अमेरिकन gun culture से नफ़रत करने लगते हैं? बच क्या गया? धर्मांध की अफ़ीम बाँटने और परोसने वाली पार्टियाँ? जो बँदर बाँट की तरह, दो बिल्लिओं को पास बिठाकर, उनका सबकुछ हड़प जाता है? तो राजनीती या कोई भी राजनितिक पार्टी समाधान नहीं है। बल्की, वो तो अपने आप में समस्या हैं। कुर्सी पाने के लिए कुछ भी करेंगे। 

मगर ऐसा भी नहीं, की किसी भी पार्टी में कुछ भी अच्छा ना हो। कुछ तो होगा ही, जो इतनी जनता इन्हें चाहती है? वैसे भीड़ तो इतनी पागल भी हो सकती है, की वो हिटलर और सद्दाम हुसैन जैसों को, दशकों कुर्सियों पर बिठा दें? शायद नहीं? इसका मतलब मीडिया प्रबंधन जबरदस्त है। क्यूँकि, ऐसे लोग या पार्टियाँ, जो दिखाना और सुनाना चाहते हैं, जनता तक सिर्फ उतना ही पहुँचने देते हैं। और अपने कांड़ों को छुपा जाते हैं। ऐसे में रस्ता क्या हो? वो भी शायद मीडिया और मीडिया प्रबंधन वालों से ही होकर गुजरता होगा?

आम लोगों को हर पार्टी से अपने मतलब का जो कुछ अच्छा है, उसे निकालने की कोशिश करना होना चाहिए। क्यों किसी की खामखाँ की भक्ती हो? क्यूँकि, यहाँ फ़ोकस शिक्षा है, तो जानने की कोशिश करते हैं, की कौन क्या और कितना कर रहा है? क्यूँकि, शिक्षा ही एकमात्र रस्ता है, किसी भी समाज की प्रगति का या पीछे रह जाने का। कहाँ से शुरु करें? पैन, पैंसिल, चाक, मार्कर, बोर्ड, किताब, लैपटॉप, नोटबुक, नैटबुक या न्यूज़बुक से? ये चर्चा का विषय होना चाहिए, हर पार्टी के लिए, हर छोटी-बड़ी कंपनी के लिए, हर तरह के मीडिया के लिए। किसी भी समाज का भविष्य यहीं से आगे बढ़ना है। 

Addictions can be created as well as treated, process is almost same.

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